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About Rajrajeshwari Prakashan

Rajrajeshwari Prakashan
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श्री गोपाल दास अग्रवाल एवं उनके छोटे भाई श्री गिरधारी लाल अग्रवाल ने जून सन् 1965 में “श्री गोपाल पुस्तकालय, मथुरा” की स्थापना की। सन् 1977 से 2000 तक “गोपाल कालदर्शक पंचांग” का प्रकाशन किया, जो उत्तर भारत का लोकप्रिय पंचांग बना।

गोपाल पुस्तकालय, मथुरा द्वारा प्रकाशित प्रमुख धार्मिक ग्रंथों - रामायण, श्रीमद्भगवद् गीता, महाभारत, शिव पुराण, सुख सागर, सूरसागर इत्यादि सभी प्रकार की धार्मिक कथाएँ, चालीसा, व्रत त्योहार, तंत्र एवं ज्योतिष के साथ व्यावहारिक पुस्तकों का प्रकाशन लंबे समय तक किया गया। भारत के हिंदी भाषी सभी राज्यों में गोपाल पुस्तकालय, मथुरा द्वारा प्रकाशित ग्रंथ एवं पुस्तक लोगों के बीच लोकप्रिय रही।

सन् 1996 में श्री गिरधारी लाल अग्रवाल के सुपुत्र श्री दीपक अग्रवाल ने ऊषा प्रकाशन मंदिर की स्थापना की तथा सन् 2002 में श्री गोपाल पुस्तकालय एवं ऊषा प्रकाशन मंदिर को मिलाकर ऊषा पब्लिशिंग हाउस बनाया। अब सभी पुस्तकों का प्रकाशन उक्त प्रकाशन के तहत किया जाने लगा।

सन् 2013 में ऊषा पब्लिशिंग हाउस, मथुरा को श्री दीपक अग्रवाल एवं उनके छोटे भाई जितेंद्र अग्रवाल द्वारा श्रीजी विद्या मंदिर में बदला गया। अब सभी पुस्तकों का प्रकाशन श्रीजी विद्या मंदिर द्वारा होने लगा। सन् 2022 में श्री जितेन्द्र अग्रवाल अपना कारोबार अलग करने लगे और उन्होंने श्री दीपक अग्रवाल का कारोबारी साथ छोड़ दिया।

Founder Rajrajeshwari Prakashan

सन् 2022 में दीपक अग्रवाल द्वारा राजराजेश्वरी प्रकाशन, मथुरा की स्थापना की गई। अब राजराजेश्वरी प्रकाशन की बागडोर पूर्णतः दीपक अग्रवाल के हाथों में है।

श्री दीपक अग्रवाल ने समय की डिजिटल माँग को देखते हुए इस वेबसाइट को भविष्य के लिए बनवाया है। आगे भी समय के अनुसार पुस्तकों का प्रकाशन एवं डिजिटलाइजेशन करते रहेंगे।

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गुरु के बिना कोई काम संभव नहीं होता। अतः मुझे मेरे गुरु पंडित मनीष शंकर शास्त्री (श्री ज्ञानानंद नाथ) श्रीजी पीठ श्रीजी दरबार, मथुरा से दीक्षा सन् 2007 में प्राप्त हुई और उन्हीं के परम आशीर्वाद एवं श्रीजी की कृपा से राजराजेश्वरी प्रकाशन आगे बढ़ रहा है।

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मेरे मित्र पंडित राजेश मिश्रा जी जो कि वर्तमान में राजस्थान की एक सुविख्यात संस्था में सेवाएं दे रहे हैं। इससे पहले भी ये समय-समय पर विभिन्न प्रकाशनों को अपनी ज्ञानानुभव से अनुग्रहित कर चुके हैं, उन्होंने मेरा समय-समय पर मार्गदर्शन किया। जहाँ कहीं भी आवश्यकता हुई उन्होंने अपना अमूल्य सुझाव एवं सहयोग दिया। आज जो भी पुस्तकें प्रकाशित है उन सभी की साज-सज्जा में उनका अतुल्य योगदान है एवं इस वेबसाइट के निर्माण में भी उनका अमूल्य सहयोग रहा है, जिसके लिए मैं उनको सहृदय धन्यवाद प्रकट करता हूँ।

विशेष आभार
मेरे प्रकाशन को आगे बढ़ाने में यूं तो बहुत लोगों का सहयोग है लेकिन इनमें से कुछ खास हैं जैसे श्री बाबूलाल अग्रवाल (जयपुर पेपर्स), श्री मुदित अग्रवाल (नालंदा ऑफसेट जयपुर), श्री जुगल किशोर भाटिया (कमल पेपर्स, मथुरा)।
हमारे प्रमुख वितरक
खंडेलवाल ग्रन्थालय प्राइवेट लिमिटेड (वृंदावन), प. द्वारिका प्रसाद शिव गोविंद पुस्तकालय (अयोध्या), श्री हरि पुस्तक प्रचार केंद्र (जयपुर), मोहन न्यूज एजेंसी (कोटा), आनंद प्रकाशन रजिस्टर्ड (दिल्ली), गर्ग एंड कंपनी (मुंबई), अग्रसेन ट्रेडर्स (भोपाल), गुरुदयाल सिंह बुक सेलर (अंबाला), राजकुमार जुगल किशोर बुक सेलर (देहरादून), धार्मिक पुस्तक भण्डार (ऋषिकेश), जवाहर बुक कंपनी (मेरठ), हिंदी सेवा सदन (मथुरा), संदीप जितेंद्र बुक सेलर (राजकोट) एवं अन्य वितरकों के साथ-साथ पुस्तक निर्माण में शामिल सभी मुद्रक, जिल्दसाज इन सभी का सहृदय धन्यवाद।

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